
फुसफुसाता पुस्तकालय
सुनना अपने आप में एक जादू है।
एक धूप से भरे उजले कमरे में, लिली नाम की एक शर्मीली लड़की जादुई पुस्तकालय जाना बहुत पसंद करती थी। वह हमेशा लोगों के आस-पास घबरा जाती थी, इसलिए वह किताबों को सुनना पसंद करती थी। एक दिन, जब वह एक चमकती लाल किताब पकड़े हुए थी, तो उसने एक धीमी फुसफुसाहट सुनी, 'नमस्ते!'
लिली चौंक गई। उसने चारों ओर देखते हुए पूछा, 'यह किसने कहा?' पुस्तकालय अध्यक्ष, एक बुद्धिमान बूढ़ा उल्लू जिसका नाम ऑलिवर था, मुस्कुराया। 'अगर तुम ध्यान से सुनो तो किताबें अपनी कहानियाँ फुसफुसाकर सुनाती हैं! फिर से कोशिश करो, लिली!' यह सवाल सुनकर लिली के गाल गर्म हो गए। क्या वह भी एक कहानी सुना सकती थी?
गहरी सांस लेते हुए, लिली ने किताब को और कसकर पकड़ लिया। 'मैं कोशिश करूँगी!' उसने बिल्कुल स्थिर खड़े होकर कहा। उसने फिर से ध्यान से सुना और किताब को एक बहादुर शूरवीर के बारे में फुसफुसाते हुए सुना। 'मुझे यह कहानी बहुत पसंद है!' उसने कहा, उसकी आवाज़ और मज़बूत होती गई।
ऑलिवर ने उत्साह से अपने पंख फड़फड़ाए। 'अब, किताब को अपनी पसंदीदा कहानी सुनाओ!' लिली ने गहराई से सोचा। एक बड़ी मुस्कान के साथ, उसने एक चमकते हुए ड्रैगन की कहानी सुनाई जिसे मदद करना बहुत पसंद था। उसके चारों ओर की किताबें खुशी से चमकने लगीं। 'तुम्हारे शब्दों में जादू है!' ऑलिवर खुशी से बोला।
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